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दिवाली पर हिंदी कविताएँ | РОEM ОN DIWАLI IN HINDI

 दिवाली  पर  हिंदी  कविताएँ  |  РОEM  ОN  DIWАLI  IN  HINDI

Роem  оn  Diwаli  in  Hindi

खुशियों  की  दिवाली

लौटे    थे    जब    राम    अयोध्या,
करके    रावण    का    संहार।
असत्य    पर    सत्य    की    जीत    हुई    थी,
मिटा    था    बुराई    का    अंधकार।
फैलाने    उजियाला    सच्चाई    का,
खुशियों    की    दीपावाली    आई    थी।
नई    उमंग    से    भर    गये    थे    मन,
घर    आंगन    में    खुशहाली    आयी    थी।
राम    सिया    संग    अयोध्या    जब    आये,
पुलकित    हो    गया    घर    आँगन।
सजाके    दीपों    की    माला    से    नगरी,
खुशियों    की    दीवाली    आयी    थी।
राम    राज्य    आया    था    फिर    से,
जन-जन    में    थी    खुशियाली।
मानो    लगता    था    सुने    उपवन    में,
आ    गयी    हो    फिर    से    हरियाली।
इस    हरियाली    की    शोभा    बनने,
खुशियों    की    दीवाली    आयी    थी।
कह    उठे    जिससे    दीवाली,
सतयुग    जैसी    इस    युग    में    भी    आई    थी।
पावन    पर्व    को    आओं,
हम    सब    मिलकर    मनाए।
जलाए    दीप    ख़ुशियों    के    घर-आंगन    में।
इस    धरती    को    स्वर्ग    बनाये।

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